दर्द हर किसी की जिंदगी में
कभी न कभी शुमार होते हैं
इससे सिर्फ गरीब लोग ही नहीं
अमीर भी खूब बेजार होते हैं
माना अमीरों के पास साधनों
का बेड़ा होता है भारी भरकम
पर दर्द बांटने को प्राय: उनके
पास कांधे पड़ जाते हैं कम
ईश्वर सबको सब कुछ नहीं यानी
एक बराबर सा नहीं देता है
ऐसा करके वह मनुष्य के सब्र
और संतोष की परीक्षा लेता है


