गद्दारों की नजर गड़ी है
भारत की आजादी पर
अमन नहीं भाए उन्हें
वे अमादा बर्बादी पर
हंसते चेहरे जज्ब नहीं
वे नफरत के पैरोकार
नागों जैसी फितरत तन
मन में धारे जहर अपार
मौका पाकर वे विष ही
उगलें. भले करो उपकार
वे पर पीड़ा को ही मान
बैठे हैं जीवन का आधार
भारतवासियों को रहना
होगा मन से सदा सतर्क
इस वतन को चोट पहुंचा
न सके कोई भी कमजर्फ


