जीवन से भरी दुनिया की
चाल ढाल में अजब लोच
कहीं विज्ञान कुलांचे भर रहा
कहीं हाबी है उन्मादी सोच
जाति धर्म के नाम पर बड़े
हिस्से में जारी है मार काट
खुद को विकसित कहने वाले
देश करा रहे जग में कांट छांट
आज दुनिया भर में बज रहा है
पूंजीवादियों के नाम का डंका
सब अपने तौर तरीके से रच रहे
धन संपदा की नई नवेली लंका
असंख्य लोगोंं को उम्मीद यही
के फिर अवतरित होंगे प्रभु राम
जो धन संपदा के भूखे दशाननों
की करतूतों पर लगाएंगे विराम
प्रभु राम के साथ ही आएंगे बल
बुद्धि के धाम वीरबली हनुमान
दशाननों से त्रस्त जनता की पीड़ा
का वो ही करेंगे समुचित निदान


