
सुबह गयी शाम का नज़ारा आगया
नाव क्या मोड़ी, किनारा आ गया
इश्क़ था उसको, उसे तो डूब जाना था
देखो तैरकर कैसे, वो बाहर आ गया
वो जिनको पार करना
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सुबह गयी शाम का नज़ारा आगया
नाव क्या मोड़ी, किनारा आ गया
इश्क़ था उसको, उसे तो डूब जाना था
देखो तैरकर कैसे, वो बाहर आ गया
वो जिनको पार करना