ये चलनी,उपवास,चांद ये तारे, सब क्या है?

चलो इनसे ही कोई पूछे की मुहब्बत क्या है?


अब तक तो महज सुने थे किस्से फरिश्तों के

आज हमसे न कोई पूछे कि फरिश्ते क्या है?


रोज़े रख रख कर खुदा कर डाला हमको

हर तरफ तेरे ही चर्चे है और खुदा क्या है?


क्या ढूंढते तो शक्ल मेरी चाँद में तुम यूँ

तुम ही तुम हो सब जगह,अब चाँद क्या है?


ये जिस्म जान रूह और सारी जवानी मेरी

ये सब का सब तुम्हारा हुआ, हमारा क्या है?


तेरी प्यास से और बढ़ी जाती है प्यास मेरी

मेरा पूरा जहां तुमसे, बाकी जमाना क्या है!


~उमेश कुमार