आ दिल मे बैठ ठिकाना कर

अब और ना कोई बहाना कर


इक ुदनिया है मेरी आँखो में

तु आँखों मे आ इसे रवाना कर


यूँ तो ज़ख़्म है दिल पे पहले से

तु नये दे दे पुराने को पुराना कर


ठहरता ही नही है वक़्त मेरे साथ

तु इक इक लम्हा एक जमाना कर


हम इश्क़ में हारे हैं तो हम बेचारे है

तु इश्क़ लूटा,और दर्द खज़ाना कर


~उमेश