आधा-आधा
प्रभु ऐसा जीवन देना मुझको, सब कुछ आधा आधा हो
आधा मेरे मन का हो और आपके मन का आधा हो
आधी क़िस्मत तुम लिख लेना आधी मेरी इच्छा हो
मेरी मुझको करने देना, बाक़ी सब कुछ अच्छा हो
आधे दिन की करूँ चाकरी, आधे दिन की मौज रहे
आधी होगी ज़िम्मेदारी, आधी छुट्टी रोज़ रहे
मेहनत थोड़ी कर लूँगा, तुम फल की देना झड़ी लगाए
आधी कीर्ति मैं रख लूँगा, आधी तुमको दूँगा चढ़ाय
रिश्ते ऐसे देना जिसमें साथ भी आधा आधा हो
दिन में पत्नी साथ चले और साँझ ढले संग राधा हो
मित्र भी देना ऐसे जिनका कर्ण के जैसा वादा हो
माधव जैसे चंचल हो और राम की सी मर्यादा हो
शत्रु देना ऐसे जिनका लड़ने का मन आधा हो
मेरे रस्ते साफ़ रहें और उनके पग में बाधा हो
इतनी देना बुद्धि के ज्ञान की तृष्णा बनी रहे
आधा मान आधा अभिमान आधी निर्मरलता बनी रहे
सूरज जैसा तेज रहे, चंदा जैसी चितवन हो
आधे मन में बजे बांसुरी, आधा मन गोवर्धन हो
औरों का दुःख बाँट सकूँ मैं, ऐसा कोमल मन देना
अपनी बात को रख पाऊँ मैं, इतना टेढ़ापन देना
ख़ुशियाँ इतनी देना के मैं सबके साथ में बाँट सकूँ
तबियत मस्त मलंगा जैसी फ़क़ीरों वाले ठाट रखूँ
आधा जीवन सुख से बीते बाक़ी आधे में शांति हो
अपना मन भी लगा रहे, धूप छाँव की भाँति हो
मेरी इतनी इच्छा है प्रभु हर पल मेरे साथ चलें
जीवन की शतरंज में चालें मेरी ओर से आप चलें
जीवन ऐसा जी लू जैसे हरदम चलने को तैयार
यम भी आयें लेने को तो उनका मन भी आधा हो


