घर पर अपनी बात रखने पर तुमने
किया उसे कोठरी मे बंद,
‘हा’ की जगह जो तुमने उसके मुंह से
सुना जो ‘न’ तो लगाए दो खीचकर
सब्जी में नमक ज्यादा होने पर
तुमने गुस्से में फेंकी प्लेट
जरा सा रोटी जल जाने पर तुमने
उसी आग में किए उसके हाथ लाल
घर से निकाल फेंका तुमने उसको
क्योकि लड़की पैदा हुई हर बार
कितनी औरत ,कितने जख्म,
कितने हजारो साल
कब जीने के लिए छोड़ोगे
उन्हे उनके हाल...

