#सौंदर्य
यौवन काल की काया जितनी सरस होती है,
उतनी ही बुढ़ापे में विरस हो जाती है।
फिर इस क्षणभंगुर सौन्दर्य पर इतना गर्व क्यों।
काला काला मत कहे सावरियां
काले रंग मोरनी काहे रुदन करें।
तवा भी काला,कड़ाही भी काली,
जिन पर छप्पन भोग बनें।।
काले रंग पर काहे तू रुदन करे,
बाल भी काले काजल भी काले।
जिन सोलह श्रृगांर सजे।
काले रंग पर तू काहे रुदन करे !!,
गाय भी काली,भैंस भी काली।
जिनसें दूध सफेद मिले।।
काले रंग पर मोरनी रुदन करें।
कृष्णा भी काले,काली भी काली।
जिनको सारा संसार पूजे।।
काले रंग पर मोरनी फिर रुदन करें !!
तन की सुंदरता से अधिक व्यवहारिक,मानसिक व मन सुन्दर होना चाहिए!!!


