तेरी आंखों में समंदर है क्या,मै डूबता जा रहा हूं,तेरे जिस्म में चुंबक है क्या,मैं चिपकता जा रहा हूं ,बता क्या राज है तुझमें ,मैं उलझता जा रहा हूं ,मैंने इश्क तो बेहिसाब किया था,पर पता नहीं क्यों ? फिर भी फिसलता जा रहा हूं...'उरमलिया' उज्ज्वल ✍️