हर जज़्बे का लफ़्जों में तर्जुमा नहीं होताकभी हो जाता वो जिसका ग़ुमां नहीं होताकह पायेंगे भी दिल की बात कैसे आख़िरथरथरा रह.जाते लब कुछ बयां नहीं होता@काबू मशरिक़ी