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चला चल


ख़ामोश ये फ़िज़ा है मदहोश ये जहां,पहेली लगने लगा है हर सिम्त ये समां।बंद करके दरीचों को सुन ऐ सुख़नवर,चला चल ये न सोच किधर और कहां।@काबू मशरिक़ी

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