Poetry 1 min read 785.6K reads

बानगी


ज़िन्दगी की ये बानगी देखिये,सांसों की यह तिश्नगी देखिये।रुख़सत की घड़ी आन पहुंची,चलती चन्द सांसें टूटती देखिये।

काबू मशरिक़ी

Read more Earn more Learn more