एक कहानी है, सुनोगे?

बेताबी से बतलाना चाहता हूं तुम्हे,
सुनाऊंगा, तो समझोगे?

खैर छोड़ो!
फुर्सत से,कभी गौर फरमाना मेरे खामोशी पे,
कुछ सवाल छिपी मिलेगी तुम्हें इन निगाहों में।

याद है?
तुम कहा करते थे,
के हमेशा रहोगे शामिल मेरे अपनों में।
जो अब इस वादा ए वफा पर अमल ही नहीं करनी,
तो बताओ, फिर
क्यों आती हो मेरे सपनो में?
है जवाब ?

जवाब देने वाले नजरे नहीं चुराया करते!
पर तुम्हें आंख मिचौली खेलने से फुरसत कहा?