किसी नज़र को तेरा इंतज़ार आज भी है
कोई है जो तुझ पे मेहरबाँ आज भी है
तू ने अपने लफ़्ज़ सज़ा रक्खे हैं उफ़ुक़ पे कहीं
कोई उनसे मिलने को परेशाँ आज भी है
चश्म को हर-सू रु-ए-शफ़क़ नज़र आता है
पर तेरे नील की चाहत बेइंतहाँ आज भी है
कहते थे ‘तुम’ के मिरा दिल काशना है तुम्हारा
कहाँ हो के मिरे हर्फ़-ओ-सौत बेज़ुबाँ आज भी है
जानती हूँ कि हैं पज़ीराई तुम्हारे इर्द गिर्द कई
पर इस उजाले की तुम्हीं से फ़रोज़ाँ आज भी है
©LightSoul
उफ़ुक़ - क्षितिज / horizon
चश्म - आँखें / eyes
हर-सू - चारों तरफ़ / everywhere
रु-ए-शफ़क़ - इंद्रधनुष / rainbow
काशना - घर / abode
हर्फ़-ओ-सौत - word and sound
पज़ीराई - entertainment
फ़रोज़ाँ - shining


