सबके अलग-अलग मशवरे हैं मेरे लिए,
कोई कहता है तू जिद्दी बहोत हैं,
कोई कहता है तू बोलती बहोत हैं,
और कुछ कहते हैं कि तू खामोश बहोत हैं,
कोई कहता बिन कारण तू हंसती हैं बिन कारण तू रोती बहोत हैं,
पर उन्हें क्या पता कि मेरे पास कारण बहोत हैं,
 कोई मुझसे बातें करता बहोत हैं,
तो कोई नाराज़ बहोत हैं,
कोई कहता है तू नदी सी ठहरती कहा है,
 तो कोई बतलाता हैं,
तू समन्दर सी गहरी बहोत हैं,
 किसी को मुझ पर विश्वास नहीं,
पर किसी को मुझ पर एतबार बहोत हैं,
 कोई मुझे नासमझ तो कोई मुझे अकेली कहता हैं, पर उन्हें क्या मालूम कि मेरे साथ बहोत हैं,
कोई मुझे मतलबी तो कोई पागल कहता है,
 पर कुछ है चुनिंदा लोग मेरी जिन्दगी में,
जो हंसकर कहते हैं
मुझे अरे पागल तू समझदार बहोत हैं।