रूठने वाले को गुरूर था कि कोई अपना उसे मनाने
जरूर आयेगा,
सोचा था उसने कि थोड़ी अकड़ मैं भी दिखाऊंगा, ऐसे ही थोड़ी ना मान जाऊगा,
दिन में एक बार तो अनजान भी पूछ लिया करते हैं, वो दो तीन बार पुछेगा तो मैं अपना हाल सुनाऊगा, थोड़ा उसे सताऊगा,
उसे उसकी गलतियां भी बताऊंगा,
पर आखिर में पक्का मान जाऊंगा,
लोग कुछ भी कहें, पर उसे विश्वास था कि कोई उसे मनाने जरूर आयेगा,
पर उसे मालूम न था कि मनाने वाला खुद रूठ जायेगा,
उसका हर रिश्ता, हर वादा और आखिर में उसका गुरूर भी टूट जायेगा ।


