बंधुत्व: प्रकृति का अधिकार's image
Poetry2 min read

बंधुत्व: प्रकृति का अधिकार

तुषार "बिहारी"तुषार "बिहारी" April 22, 2022
Share0 Bookmarks 43600 Reads0 Likes
ये बंधुत्व ना है इंसानों का,
ये बंधुत्व ना है भगवानों का ।

बंधुत्व है प्रकृति और इंसानों का,
बंधुत्व है हर एक आशियानों का ।

जुड़ी है जिससे जीवन की हर एक सांस,
उसी प्रकृति से है जीवन की हर एक आस ।

निरंतर करें हम प्रकृति के मान का प्रयास,
उसी से बढ़ेगा हम पर प्रकृति का विश्वास । 

प्रकृति करती है निरंतर हम पर उपकार,
जो देती रहती है हमें अनमोल उपहार ।

बढ़ेगा बंधुत्व से प्रकृति का प्रकार,
ना करेगी वो हम पर भयावह प्रहार ।

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts