आंधीयों को झेल कर, 

तुफानों से लढ कर,

पत्थरों के बीच, 

दरख्तों को चिर कर...

आसमां को चुनौती देता हुआ,

वह खिल उठा, 

ख़ुद बहार बनकर...

हां, वह फुल,अब जी उठा,

डंके की चोंट पर..

- तुकेश