आंधीयों को झेल कर,तुफानों से लढ कर,पत्थरों के बीच,दरख्तों को चिर कर...आसमां को चुनौती देता हुआ,वह खिल उठा,ख़ुद बहार बनकर...हां, वह फुल,अब जी उठा,डंके की चोंट पर..