1 min read 797.8K reads

फूल


आंधीयों को झेल कर,तुफानों से लढ कर,पत्थरों के बीच,दरख्तों को चिर कर...आसमां को चुनौती देता हुआ,वह खिल उठा,ख़ुद बहार बनकर...हां, वह फुल,अब जी उठा,डंके की चोंट पर..

— तुकेश
Read more Earn more Learn more