हरगिज वो मेरे हक मे वफादार नहीं हैंअब हम भी फ़कत उसके तलबगार नहीं हैंवो चाहे जिसे दिल में रखे ये वफ़ा उसकीदिल फ़िर भी हमारा कभी बाज़ार नहीं हैं
हरगिज वो मेरे हक मे वफादार नहीं हैंअब हम भी फ़कत उसके तलबगार नहीं हैं
वो चाहे जिसे दिल में रखे ये वफ़ा उसकीदिल फ़िर भी हमारा कभी बाज़ार नहीं हैं