एक वक़्त था हम रोज़ मिला करते थे
यादों के फूल हर रोज़ खिला करते थे
वो शाम को मेरा ऑफिस घर आना
तेरा रस्ते पे नज़रों को जमा रखना
वो देख कर मुझे खिलखिला उठती थी
बादलों में जैसे बिजली चमकती थी
देख कर उसे में भी खुश हो जाता था
और खाना पीना सब भूल जाता था
बस बैठ कर घंटों उसे निहारा करता हूं
में रात दिन उसके सदके उतारा करता हूं
वो हर दम मेरे यादों में सफर करती है
में हर दम उसके ख्यालों मे गुम रहता हूं
✍️✍️ Tufail Adeeb
