फिक्र जब छोड़ दी हमने ज़माने की
नहीं अब कोई ख्वाहिश उसको पाने की
अज़िय्यत हिज्र तन्हाई ये रुसवाई
हमारी ये सजा है दिल लगाने की
हमे काफी है अब तो एक ही हुज़रा
ज़रूरत तुम को है अब आशियाने की
सभी के सामने हमको किया रुसवा
अदा उसकी यही थी दिल जलाने की
मिली दौलत जो है तुमको विरासत मे
जगह देखो इसे फिर अब लुटाने की
Shayar ✍️ Tufail Adeeb
