याद बनकर के दिल पे छाने लगी

वो  मुझे  रात  दिन  सताने  लगी

फायदा  ये  हुआ  तुझे  पाकर

जिंदगी  और  मुस्कुराने  लगी

मुब्तिला इश्क में दिल हुआ उसके

पैर अपने वो अब  ज़माने लगी

वो है तितली चमन की अब मेरे

साथ हर  हम वो गुनगुनाने लगी

अब मुकम्मल है दिल पे हक उसका

हक वो अपने सभी जताने लगी

वो  हैं  चंचल  सी  और  में अकडू

फिर भी  नखरे  सभी उठाने लगी

जब खटकती है जुल्फ को अपनी

ऐसा लगता है जां भी जाने लगी

फ़िक्र साक़ी की अब नहीं  हमको

जाम  नज़रों  से  वो पिलाने लगी

Shayar ✍️Tufail Adeeb