अज़ल से आरजू _ए वस्ल है मुझकोभुला कर याद तेरी शक्ल है मुझकोउसे अपना कहूं या फिर कहूं बेगानामगर इतनी तो यारों अक्ल है मुझकोमेरा अखलाक ही पहचान है मेरीमयस्सर ही ये ऐसी नस्ल है मुझको
अज़ल से आरजू _ए वस्ल है मुझकोभुला कर याद तेरी शक्ल है मुझको
उसे अपना कहूं या फिर कहूं बेगानामगर इतनी तो यारों अक्ल है मुझको
मेरा अखलाक ही पहचान है मेरीमयस्सर ही ये ऐसी नस्ल है मुझको