जिंदगी को बड़े करीब से देखा है मैंने,
रिश्तों को अजनबी बनते देखा है मैंने,
प्रेम को बिकते देखा है मैंने,
ज़िन्दगी की करीब से देखा है मैंने।
याद है वो दिन जब बिना त्योहार के भी चाय रहता था पूरे आंगन में उल्लास,
और आज का भी एक वक़्त है जब पूरा आंगन है उदास
वो समय भी बड़ा गजब था जब साथ अपने हुजूम चलता था,
और आज इस भीड़ में नहीं है कोई जाना पहचाना।
गर्व था जिन लोगो पर की नहीं छोड़ेंगे कभी साथ,
वो आज न जाने क्यों हो रहे बेवजह नाराज।
जिन रिश्तों के भरोसे छूना चाजा आसमान,
जब पलटकर देखा तो गिरने पर थामने वाला न था
एक भी हाथ।
जिंदगी को बड़े क़रीब से देखा है मैंने।