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मैं आऊँगा


मैं एक एक को तोड़ूँगामैं किसी को नहीं छोड़ूँगा

मैं खोद के खड्डे लाऊँगाफिसलाके तुम्हें गिराऊँगा

साँस खिंचवा के ग़ुब्बारों सेतुमसे जो चाहे बोलवाऊँगा

मेरी एनक सबसे सुथरीसब की आँखों पे चढ़वाऊँगा

तुम धारा-धारा चिल्लाओगेमैं अनंत समुंदर सा आऊँगा

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