बता दे सनम मैं कैसे ये भूलू ,की चेहरा गुलाबी ये हटता नही है ।

जुल्फों को कैसे समेटु बदन पे ,मेरा यार यादें वो रुकता नही है ।

कभी मुस्कराते हँसाते जहाँ को ,तुम्हारी ये सूरत भूलता नही है।

गुलाबों की फूलो सी जैसे सुहाने ,क़टीला बदन अब बिसरता नही है ।