मैं अयादत अपने चिलमन से तेरे हुस्न गुलजार का किया करता था
मैं तरकीब से तेरे सफर मेंंं तेरे साथ आया करता थाा
देखा जब मैं उस दिन उन दीवारों केेे पीछे तुझे
यू दरिया में बैठकर गैरों केेेे बीच तेरा दीदार किया करता था।

महफूज हो गया था, तेरे हुस्न के मयखाने में ।मोहब्बत के झरने बह रहेेेेेे थे ,तेरे इस दीवाने में।
मचलती चाल हिरनी सी बड़ी मासूम थी तेरी ,
बना परछाई फिरता में तेरे साए के पीछे में।

तेरी नजरों केेेे साए मे मेरा, वह शहर जलता था
उठा थााााा इश्क का धुआं अब सारा शहर घूमता था।
सजी थी महफिले तेरे अकीदत केेे तराने मेंं।
मैं यूं ही तेरे नजराने मेंंं तेरा, नाम लिखता था