मेरी जिंदगी सुनी है ,तुम्हारे बिना।
तुम्हारी हर एक मुस्कान ,के बिना।
तुम्हारी प्यारी आवाज जब,तलक नही सुनता।
तब तलक जिंदगी वीरान है ,तुम्हारे बिना।
तुम क्या हो शायद ,तुम्हे नही पता।
किसी के जिंदगी की चाँद हो,तुम्हे नही पता ।
वो देखता है सितारों के बीच चमकता तुमको
तुम उसकी जान हो ,शायद तुम्हे नही पता।
लाख गर्दिशे बवंडर मचाई ,तबाही जिंदगी ने
तुम वो खड़ी स्तंभ हो,तुम्हे नही पता ।
तुम्हारी अठखेलिया को बंद करके पर्दे में रखता है ।
तुम उसके लिए अनोखी पक्षी हो, तुम्हे नही पता।
नजारे रंजिश और साजिश भरी,नजरो ने देखा।
तल्ख को तोड़ कर ,कब्र भी बनते देखा ।
जब अकीदत टूटता है मेरे क़ाबिले ऐतबार
तब दिल मे क्या होता है ,तुम्हे नही पता ।


