आज पूरी रात ,तेरे माथे की बिन्दीया रुलाती रही।

मेरे आंखो मे,वो तेरी आंखे नजर आती रही ।

उस सफेद चादर को यू ना पास रखा कर ,

हमारी रंगीन जिन्दगी की ,वो याद दिलाती रही।।


पता है तेरे नाको की ये कील,कैसे मै भुल जाऊ ।

तेरी प्यारी तस्वीर दिल मे,उतार लाऊ 

एक बार मुझसे मेरी जिन्दगी के,हाल तो पुछ ले ।

पूरी जिन्दगी तेरी याद मे ,अकेले बिता मै जाऊ !!


मुझे अपनी दर्द की परवाह नही ,जिन्दा हू ,पर होश हवास नही ।

खुश हू कि तू खुश तो बहुत है,क्योकी तेरा कही अपमान तो नही ।

कहती हो मुझको की, बाहो मे जाके भुल गये हो तुम।

पर सच तो ये सुन ,अब ये हाथ बाहो के लिये उठते ही नही ।।


एक दो दिन का साथ नही था ,जो मै भुल जाऊ ।

तेरे यादो मे ही जियुंगा,पर सामने न आऊ।।

देख लिया करूँगा कभी चांदनी को ,तुझे समझ कर ।

पर तेरी उस धीमी आवाज को,कभी भुल पाऊ