अगर मैं गांव का हु ,तो गवार हु क्या?
अगर मेरे मकान कच्चे है ,तो कोई श्राप है क्या ?
मैं खुश हूं अपने कच्चे इमारतों से
अगर मेरी परवरिश गांव में हुई ,तो कोई गुनाह है क्या??
एक ही घर मे ,रिश्ते की दुकान तो देखो !
चाचा ,ताऊ ,दादा ,दादी का प्यार तो देखो !
अगर कभी पड़ जाए, प्यार में कमी कोई तो !
एक रोटी को चार में करते ,खाने को देखो !
अपने गांव की पगडंडी , किसी तीर्थयात्रा से कम है क्या
ये अपने खेत,किसी मंदिर से कम है क्या।
हम मारे मारे फिरते है ,इस अजनबी दुनिया मे
मेरा ये छोटा सा गांव ,किसी स्वर्ग से कम है क्या ।
तेरे तनिक से दर्द में ,सबका दौड़ जाना कोई मजाक है क्या ।
शाम को चौपालों पर बैठकर ,यू ही प्रधान बनाना कोई आसान है क्या ।
वो तो टूट जाते है कुछ कठिनाईयो से
वर्ना सुबह उठकर फिर से दौड़ जाना,ऐसा कही जज्बात है क्या


