अग्निपथ पर ,
अपनी शपथ पर,
निर्भय जाते हैं ।
शत्रु जाल से,
यम और काल से ,
जूझ प्राण पण-
विजय भी लाते हैं ।
संकल्प अटल से ,
बस आत्म बल से,
लौह लहू से -
इतिहास बनाते हैं ।
आंगन के फूल वो,
वतन की धूल वो,
रणअग्नि में तप-
कुंदन बन जाते हैं।
बस वही वीर,
बलिदानी धीर,
चिर युवा- अमर
सैनिक कहलाते हैं।