आड़ी रेखाएं खींचने वाले,
रौशनी में आंखें मींचने वाले,
देखो रंगों से भय खाने वाले,
कला शत्रु सब,चित्रकार बने हैं
कलियुग में कलाकार बने हैं।
हर कर कविता का सौन्दर्य,
छीन उसका सब रस माधुर्य
चीरहरण कर काव्य का देखो,
कैसे कैसे कवि अवतार बने हैं।
स्वघोषित कलमकार बने हैं।
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