माँ वह सिर्फ एक शब्द नहीं
वह प्रबल वेग की धारा है
प्रेम में वह कितनी करुणा बरसाती
क्रोध में उसने कितनों को संहारा है
माँ संग खेले भगवान राम जब
माँ ने ही जना भगवान कृष्ण को
अंजनी पुत्र जब कहलाए हनुमत
कैलाश पति की फिर पत्नी बोलीं यहीं तो हैं मेरे गणपत
माँ जैसा कोई प्यार नहीं,माँ जैसा कोई संसार नहीं
अपार शक्ति का सागर है वह,माँ जैसा कोई उपहार नहीं !!
राघवेंद्र तिवारी "राघव"