घर में था सन्नाटा छाया ,

जैसा की उम्मीद पर पानी फिर आया ,

जब पुछा तो जाकर पता चला ,

बेटी का जन्म सबको दुखी कर आया।

यही है समाज की सच्चाई ,

बेटी बुरी और बेटा है अच्छाई,

पुत्र प्राप्ति का यज्ञ सब करते ,

पुत्री की इच्छा कभी नहीं करते।

बेटा ही है कुल की शान ,

वही करेगा परिवार का नाम ,

यही सोच सबको बदलनी है ,

क्योकि बेटिया भी कुछ कम नहीं है।

कब हम इन सब से आगे बढ़ेंगे ,

कब हम बेटियों को समझेंगे ,

वह भी कर रही कमाल कई ,

नज़र फैला देखो तो सही।

स्वागत करे उस नन्ही परी  का ,

थाम ले ज़रा हाथ उसका ,

एक दिन गर्व होगा उस पर भी ,

जब छुएगी वह आसमान भी।

धन्यवाद।