किसी रात वो चकोर चंचल घर को मेरे आएभूल जाऊंगा में, की उजाला भी कभी होता है।।
किसी रात वो चकोर चंचल घर को मेरे आए
भूल जाऊंगा में, की उजाला भी कभी होता है।।