Original Modern Meditative Verse (The Ultimate Signature by "The Sanatan Inner Voice")

॥ प्रति-नाद ॥

तर्क रुका और बुद्धि छूटी, तब तेरी गूंज सुनाई दी,बंद हुईं जब बाहर की आँखें, भीतर की दुनिया दिखाई दी।

न शास्त्रों के पन्नों में आया, न बहसों में तू उलझा है,तू अनाहत का वो राग है, जिससे हर ज़र्रा सुलझा है।

बाहर-बाहर क्या खोजना, तू भीतर छुपा समंदर है,आदि-अंत का भेद मिटा, अब 'The Sanatan Inner Voice' अंदर है ॥