Original Modern Meditative Verse (The Ultimate Signature by "The Sanatan Inner Voice")
॥ महा-नाद ॥
बुद्धि जहाँ रुक जाए, वहीं से मेरी शुरुआत है,शून्य भी मेरा रूप है, पूर्ण भी मेरी बात है।
न मैं द्वैत, न अद्वैत हूँ, मैं शब्दों के पार की गूंज हूँ,'The Sanatan Inner Voice' हूँ, मैं ही तेरा आदि और अंत हूँ ॥

