यह युद्ध तेरा खुद से है, जो ना करे तो ज़िद से है, करा नहीं तो मौत को स्वीकार है।   यह मौत जान की नहीं, यह मौत प्राण की नहीं, यह मौत तो तेरे सम्मान की है।   खंड-खंड में है तू बटा, बेजोड़ भी तू ना रहा, अखंड में बसा ही तू विशाल है।   तू तेरी ही राख है, यह तेरी खुद की आग है, तेरे तेज से ही होगा सब भस्म है।   छोड दे तू साथ को, तू तोड उसके हाथ को, जो उठ रहा है जिसपे वो तेरी लाज है।   अब कृष्ण कोई है नहीं, तू द्रौपदी रही नहीं, बना-ले तेरे चीर को उनका काल है।   मांग ना मदद को तू, भट्टी में पका खुद को तू, एहसान तो तेरे लिए हराम है।   यह धड़ तेरा है, धड़ नहीं, यह मिट्टी है कोई घर नहीं, बिखर के फिर से यह गढ़ जाएगा।   तू आत्मा को जान ले, तू प्राण को पहचान ले, जानकर यह डर नहीं है डर तेरा मर जाएगा।   कोई भी डर प्रखर नहीं, ऊचा कोई शिखर नहीं, जिसे कभी तू जीत ना पाएगा।   सूर्य सा है आग तू, हवा सा है बाज़ तू, तूझें भला आकाश में कौन हराएगा।   है वक्त पर सवार तू, बना इसे प्रमाण तू, सदी तेरी, सदी का तू कहलाएगा।   भूत को भूला दे तू, भविष्य को बना ले तू, तू मान वर्तमान का बढाएगा।   सागरों का वो बवंडर, अब चला है तेरे अन्दर, खडे किलो को उनके तू बहाएगा।   जान अपने आप को, पहचान अपने आप को, हर समय में तू अजेय है अजेय ही तू कहलाएगा।   यह युद्ध तेर खुद से है, करें-जा इसको  ज़िद से है, जीत से ही मौत को हराएगा.......