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फर्क सिर्फ इतना था।

हाँ! बारिश बरस रही थी। फर्क सिर्फ इतना था, तेरी आँख में बरस रही थी। मेरी आँख से बरस रही थी। कहीं तो बारिश बरस रही थी।   हाँ! सपना टूट गया था। फर्क सिर्फ इतना था, तेरे दिल से टूट गया था। मेरे दिल पर टूट गया था। किसी-का सपना टूट गया था।   हाँ! रंग प्यार का धूल गया था। फर्क सिर्फ इतना था, तुझसे धूल गया था। मुझमें घुल गया था। सतरंगी प्यार का रंग धूल गया था।   हाँ! बना सब अपना खो गया था। फर्क सिर्फ इतना था, तेरे इन्कार से खो गया था। मेरे इकरार का खो गया था। कुछ बचा नहीं सब अपना खो गया था।   हाँ! यादों की घटाएँ छट रही थी। फर्क सिर्फ इतना था, तुझसे हट रही थी। मुझसे लिपट रही थी। यादों की घटाएँ ही थी जो छट रही थी।   हाँ! पलकें बन्द होती थी। फर्क सिर्फ इतना था, तेरी सपने सोचने के लिए। मेरी आँसू पोछने के लिए। पलकें तो बन्द होती ही थी।   हाँ! इस शहर में रुकना नहीं था। फर्क सिर्फ इतना था, तेरा रहना किसी ओर का था। मेरा रहना तेरी ओर का था। क्या करें शहर में रुकना संभलता नहीं था।   हाँ! वो समय बद्दुआ-सा लगता था। फर्क सिर्फ इतना था, तुझे धुआं-सा लगता था। मुझे हुआ-सा लगता था। समय वो बद्दुआ ही लगता था।
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