
कही लाल हूँ सिन्दूर में,
मैं लाली मेरे सुहाग की।
कही बंधी हूँ मगंलसूत्र में,
मैं मगंल मेरे सुहाग की।
कही बिंदी हूँ मस्तक में,
मैं निशानी मेरे सुहाग की।
कही साथ हूँ सात-फेरों में,
मैं रानी मेरे सुहाग की।
कही कुछ हूँ सब में,
मैं सबकुछ मेरे सुहाग की।
कही बात हूँ बातों में,
मैं बातें मेरे सुहाग की।
कही काजल हूँ आँखों में,
मैं दृष्टि मेरे सुहाग की।
कही श्रंगार हूँ दर्पण में,
मैं चेहरा मेरे सुहाग की।
कही बूंदें हूँ माथे में,
मैं महनत मेरे सुहाग की।
कही मोती हूँ आँखों में,
मैं आँसू मेरे सुहाग की।
क
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