आपका यूं बिन बोले मेरी जिंदगी से चले जाना
मुझे और मेरी आत्मा को अन्दर से तोड़ जाना।
क्या सिर्फ यही सच था आपकी  उन बातों का
आपके कहे कुछ शब्द कानो में गूंजते हैं मेरे ।
जो शिवाय फरेब के कुछ नहीं थे, देर से समझी
पर आप हमेशा खुश रहे यही चाहत है दिल की।
क्यूंकि शर्मिंदा तो मैं खुद के यकीन पर हूं
तो शिकायत मै भला क्यु और कैसे आपसे करूं ।