सपना पक रहा था इक,

धूप की सुनहरी आँच में।

कोई बदली घुमड़ कर अचानक,

आ गयी जो इसकी राह में।

सपना कच्चा न रह जाये कहीं,

मन सहम गया इस विचार में।

तो पापा ने अपने सपने को जला दिया,

मेरे सपने को पकाने की चाह में।

सपना पक…………….


विकास तिवारी