लम्हे लम्हे संजोकर रखता हूँ,
तेरे दीदार के लिए.
डरता हूँ तेरे मिलने पर,
कहीं वक़्त कम न पड़ जाये।
घास, पेड़ ,पौधे है
अपने जीवन का आधार,
जब ये नहीं धरा पर
तो जीवन है बेकार।
दोस्त तुझ साकोई मिलता नही,
मिलकर भी दिल भरता नहीं,
तेरी दोस्ती का कर्ज कैसे चूकाऊंगा,
बस दोस्ती के बदले दोस्ती निभाता जायूँगा।
उनकी कवितायों को प्रणाम,
उनकी प्रेरणा को प्रणाम,
उनके शब्दो को प्रणाम,
उनके आशीष की प्रणाम,
उन महान कवि को प्रणाम।


