दर्पण मेरा सच्चा दोस्त था, हमेशा से ।

मै सारी बातें बताता था, उसे दिल से। 

वो कहानियाँ जो शायद तुम्हे याद हो। 

वो सपने, जिनमे मेरा और उनका साथ हो ।

मेरी दास्तान, वो उन दिनों की,

उनकी झुकती-उठती पलकों का वो एहसान,

उनकी नज़रे और न जाने कितने मचलते अरमान ।

किस्से जो न सुनाये मैंने कभी किसी से,

वो सब, मेरे साथी ‘दर्पण’ तुम्हे मालूम है। 


विकास तिवारी