
बचपन से था प्यार जिसे
देश से अपनी जान से ज्यादा
आजादी की लौ को थामे
वतन का सच्चा रखवाला ।।
निकल पड़ा जो घर से चुपके
भारत माँ की सेवा को
आज उसे ही याद करने को
दो पल नही कोई देता क्यो।।
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बचपन से था प्यार जिसे
देश से अपनी जान से ज्यादा
आजादी की लौ को थामे
वतन का सच्चा रखवाला ।।
निकल पड़ा जो घर से चुपके
भारत माँ की सेवा को
आज उसे ही याद करने को
दो पल नही कोई देता क्यो।।