बचपन से था प्यार जिसे

देश से अपनी जान से ज्यादा

आजादी की लौ को थामे

वतन का सच्चा रखवाला ।।

 

 

निकल पड़ा जो घर से चुपके

भारत माँ की सेवा को

आज उसे ही याद करने को

दो पल नही कोई देता क्यो।।

 

 

तू था सच्चा वीर सिपाही

भारत माँ का असली बेटा

बाकी देश के रखवालो ने

बस चरखे पे धागा ही लपेटा ।।

 

 

कैसे उतारू कर्ज मैं तेरा

बस कलम स्याही में डुबोने से

डरता हूँ मैं गांधी नेहरू बनने में

नही डरता भगत सिंह होने में ।।