ओ जाने वाले,इस दुनियां पर, इतनी इनायत कर जाना।

जाते-जाते जो जख्म दिए,उनमें कुछ मरहम भर जाना।।

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सब दुःखी दिलों की,साथ अपने,संताप,वेदना ले जाना।

हमको फिर से आरोग्य जमीं, निर्दोष आसमां दे जाना।।

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हम खुली सांस लेने को भी, दो वर्षों से मोहताज रहे।

घर से लेकर चौराहों तक,निशदिन विषाणु सरताज रहे।।

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जो हर विषाणु बेअसर करे,कुछ ऐसी औषधि दे जाना।

हमको फिर से आरोग्य जमीं, निर्दोष आसमां दे जाना।।

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जो बिछड़े अपनों से, उनकी,पीड़ा, दुःख, दर्द बांट लेना।

जो बचे भुक्तभोगी, उनके, अनुभव, दु:स्वप्न पाट देना।।

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आने वाले सन "२२" को, सौगात "संजीवनी" दे जाना।

हमको फिर से आरोग्य जमीं, निर्दोष आसमां दे जाना।।

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जो देखा,सहा,वर्ष द्वय में,उसकी पुनरावृत्ति कभी ना हो।

ना ऐसी विपदा फिर आए,ऐसा भय,आतंक कभी ना हो।।

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जो बचे खुचे वायरस, सभी को, साथ स्वयं के ले जाना।

हमको फिर से आरोग्य जमीं, निर्दोष आसमां दे जाना।।