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अपने अपने किरदार

Thakur Yogendra SinghThakur Yogendra Singh December 25, 2022
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आये हैं जो इस दुनियां में,उनको इक दिन जाना ही है,

सदा सृष्टि से चलती आई है जो रस्म, निभाना ही है।

अपने अपने जीवन का विधिलेख,सभी करते हैं पूरा,

आदम के अविरल अरण्य में, अपनी राह बनाना भी है।।


कहां यहां आसान रास्ते, जीने के सबको मिलते हैं,

भाग्यवान ही होते हैं वो, जिनके मार्ग स्वयं खुलते हैं।

अतिशय तो पथ में, कंटीली झाड़ी, खाई, चट्टाने हैं,

जो प्रयास कर पार निकलते,उनके ही भविष्य खिलते हैं।।


जो निराश होकर बैठेंगे, नहीं सफलता वो पाएंगे,

जीवन पथ पर अचल रहे तो,नहीं लक्ष्य तक जा पाएंगे।

सत्कर

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