पिता
पिता
मारता,पिटता,डाँटता जरूर है।
रोकता,टोकता,ठोकता,जरूर है
नालायक,गधा,मुफ्तखोर बोलता जरूर है
लेकिन रात में फिर चुपके से आकर एक बार देखता जरूर है
पिता मन ही मन चाहता जरुर है ।
पिता थपकी मार कर सुलाता तो नही,
लात मार कर उठाता तो जरूर है
देर रात घूमने देता तो नही,
देर-रात आने पर ख़बर लेता तो जरूर है
प्यार तो बहुत करता है लेकिन मारता जरूर है
पिता मन ही मन चाहत जरूर है
खुद टूटी चप्पल पहन कर भी,तुम्हें नए जूते दिलाता जरूर है
खुद भूखा रहकर भी तुम्हें ,पेटभर खिलता जरूर है
अपने सामर्थ से ज्यादा के तुमारे सपने,साबरता जरूर है
खुद पढ़ा हो या नही लेकिन तुम्हें पढ़ाता जरूर है
पिता मन ही मन चाहत जरूर है
खुद धूप में तपता है लेकिन तुम्हें शीतलक के सुलाता जरूर है
खुद पैदल चलता है लेकिन तुम्हें फटफटिया दिलाता जरूर है
फसल चाहे कितनी भी क्यों न हो बर्बाद लेकिन
तुमारे सभी शौक़ को शौक़ से निखारता जरूर है
पिता मन ही मन चाहता जरूर है
बेटी
भंगार बेच कर भी ,श्रृंगार दिलाता जरूर है
खुद महँगा न ले कर,लहँगा दिलाता जरूर है
बिक जाए चाहे खून का एक-एक कतरा लेकिन
बेटी को ब्याह ता जरूर है
पिता मन ही मन चाहता जरूर है
By:-तेज प्रताप चौबे।
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