इस नए आरंभ में
तुम इतिहास का अध्याय होगे,
होगे तुम मेरे हर वाक्य में
सुनने ये कथा साथ ना होगे।
इस छोटे बीज़ से
कभी वृक्ष में फलों के तार होंगे,
छाएगी रुत जब बहार की
कईं फलों के हम साहूकार होंगे।
जब पूर्ण होगा उत्थान का
इस कथा के कईं पाठ होंगे,
वृक्ष में सजती रहेंगी डालियाँ
हर मौसम हम सुपात्र होंगे।

